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Sunday, 9 October 2016

Acupressure points to relieve pain

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Friday, 23 September 2016

अस्थमा (दमा) के कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक और एक्यूप्रेशर से उपचार


     अस्थमा एक फेफड़े की बीमारी है जो साँस लेने में कठिनाई का कारण बनता है। फेफड़ों में हवा के प्रवाह में रुकावट होने पर अस्थमा अटैक होता है।
अस्थमा के कारण -
    -एलर्जी
    -वायु प्रदूषण
    -धूम्रपान और तंबाकू
    -श्वसन संक्रमण
    -जेनेटिक्स (आनुवांशिक)
    -मौसम के कारण
    -मोटापा
    -तनाव
अस्थमा (दमा) के लक्षण -
    -साँस लेने में तकलीफ
    -सीने में जकड़न या दर्द
    -खाँसी
    -घरघराहट
    -लगातार सर्दी और खांसी
    -नींद में बेचैनी
    -थकान
अस्थमा के घरेलू नुस्खे -
1.    अदरक का रस, अनार का रस और शहद को बराबर मात्रा में मिलाएं। इस मिश्रण का एक चम्मच दिन में दो या तीन बार सेवन करें।
2.    नींबू में विटामिन सी भरपूर मात्रा में होता हैं जो अस्थमा के इलाज में सहायक होता है। एक गिलास पानी में आधा नींबू का रस निचोड़ लें और उसमें अपने स्वाद के अनुसार चीनी मिलाकर पीयें।
3.    आंवला दमा के उपचार के लिए एक अच्छा उपाय है। आंवला को कुचलकर उसमें थोड़ा सा शहद मिलाएं और सेवन करें।
4.    तीन सूखे अंजीर को धो लें और रात भर एक कप पानी में भिगोएँ। सुबह में खाली पेट अंजीर खा लें और अंजीर का पानी पीयें।
5.    एक चम्मच शहद में आधा चम्मच दालचीनी पाउडर मिलाकर रात में सोने से पहले सेवन करें। यह गले से कफ को निकालने में मदद करता है और इससे अच्छी नींद आती है।
6.    प्याज में मौजूद एंटी इंफ्लेमेटरी गुण दमा के इलाज में मदद करता है। प्याज को सलाद के रूप में या सब्जियों में पकाकर खा सकते है।
7.    एक गिलास गर्म दूध में जैतून का तेल और शहद को बराबर मात्रा में मिलाएं। इसमें कुछ लहसुन की कली डालकर नाश्ता करने से पहले सेवन करें।
8.    संतरा, पपीता, ब्लूबेरी और स्ट्रॉबेरी भी अस्थमा के लक्षणों को कम करने में मदद करते हैं।
9.    पानी में एक चम्मच अजवाइन डालकर उबाल लें और इसका भाप लें। आप चाहे तो इसे पी भी सकते है।
10.   ज़रूरत के अनुसार सरसों के तेल में कपूर डालकर अच्छी तरह से गर्म करें। उसको एक कटोरी में डालें। फिर वह मिश्रण थोड़ा-सा ठंडा हो जाने के बाद सीने और पीठ में मालिश करें। दिन में कई बार से इस तेल से मालिश करने पर दमा के लक्षणों से कुछ हद तक आराम मिलता है।
 11.   लहसुन फेफड़ो के कंजेस्शन को कम  करने में बहुत मदद करता है। दस-पंद्रह लहसुन का फाँक दूध में डालकर कुछ देर तक उबालें। उसके बाद एक गिलास में डालकर गुनगुना गर्म ही पीने की कोशिश करें। इस दूध का सेवन दिन में एक बार करना चाहिए।
 12.   एक कटोरी में एक छोटा चम्मच अदरक का रस, अनार का रस और शहद डालकर अच्छी तरह से मिला लें। उसके बाद एक बड़ा चम्मच इस मिश्रण का सेवन दिन में चार से पाँच बार करने से दमा के लक्षणों से राहत मिलती है।
एक्यूप्रेशर पोइन्ट्स से उपचार 

     ऊपर दिखाये चित्र में बताये गये बिंदुओ पर दिन में दो बार दबाव डाले । पंपिंग कि माफक दबाव दें । 2 सेकन्ड तक दबाये फिर 1 सेकन्ड छोड़े । इस से अस्थमा रोग संपूर्ण काबू में आजाऐगा ।

Tuesday, 16 August 2016

कामेच्छा (Libido)बढाये अक्युप्रेशर थैरेपीसे

कामेच्छा (Libido)बढाये अक्युप्रेशर थैरेपीसे 

       लिबिडो कामेच्छा बढ़ाने वाला एक जरूरी हार्मोन है । जिसकी कमी से इंसान में कामेच्छा की इच्छा कम हो जाती है। अगर आपमें अचानक से कामेच्छा की इच्छा कम हो जाती है तो कुछ अल्टरनेटिव थैरेपी इस्तेमाल करें। अल्टरनेटिव थैरेपी में एक्यूप्रेशर प्वाइंट का इस्तेमाल सबसे अधिक फायदेमंद होता है। लिबिडो बढ़ाने के लिए एक खास एक्यूप्रेशर प्वाइंट होता है। ज्यादा प्रेशर डाल कर कामेच्छा बढाई जा सकती है।
         चाइनीज थैरेपी एक्यूप्रेशर प्वाइंट बहुत सारी बीमारियों को ठीक करने के लिए उपयोग की जाती है। अगर आपको अपनी कामेच्छा से संबंधित समस्या के बारे में किसी को भी बताने में शर्म आ रही है तो इस एक्यूप्रेशर प्वाइंट का इस्तेमाल करें।
रिलेशनशिप
लिबिडो के कारण
40 फीसदी महिलाओं की ये शिकायत होती है कि उन्हें रजोनिवृत्ति के बाद कामेच्छा खत्म हो जाती है। ऐसा केवल वजाइना के सूखने के कारण होता है जो कि लिबिडो हार्मोन की कमी से होता है। इसके लिए इस एक्यूप्रेशर प्वाइंट में प्रेशर डालकर लिबिडो हार्मोन को शरीर में रीलिज करने में मदद मिलेगी।
      इसी तरह 50 फीसदी पुरुषों में 30 की उम्र के बाद टेस्टोस्टेरोन लेवल कम हो जाता है जो 70 की उम्र तक बिल्कुल खत्म हो जाता है। जैसे-जैसे पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन लेवल कम होते जाता है उनकी कामेच्छा की इच्छा भी खत्म होती जाती है। ऐसे पुरुषों के लिए भी ये एक्यूप्रेशर प्वाइंट वाला उपाय कारगर होगा।
एक्युप्रेशर प्वाइंट
लिबिडो एक्यूप्रेशर प्वाइंट
एक्यूप्रेशर थैरेपी के जरिये शरीर में लिबिडो हार्मोन को बढ़ाने में मदद मिलेगी। शरीर में लिबिडो एक्यूप्रेशर प्वाइंट दो जगह होते हैं।
स्टोमक प्वाइंट - 
        
   शरीर में लिबिडो हार्मोन बढ़ाने के लिए पेट में नाभी की जगह पर उंगुलियों के पोर से चार-पांच मिनट तक प्रेशर डालते रहें। इसी तरह से प्रेशर डालते हुए नाभी से दो उंगुली नीचे जाएं। थोड़ी देर वहां पर प्रेशर डालें। ऐसा सुबह-शाम दस-दस मिनट के लिए करें। इससे लिबिडो हार्मोन शरीर में रीलिज होगा और आपमें कामेच्छा उत्पन्न होगी।  
किडनी प्वाइंट - 
        
       किडनी आपके शरीर का सबसे अधिक प्रोडक्टिव पार्ट है जिसके आधार पर शरीर की जीवन-क्रिया चलती है। लिबिडो हार्मोन के लिए किडनी प्वाइंट काफी हेल्पफुल है। किडनी प्वाइंट एंकल बोन में होती है। एंकल प्वाइंट पर उंगुलियों के पोर से प्रेशर डालें। इससे एचिल्स टेंडन पर प्रेशर पड़ता है जो किडनी से जुड़ी होती है। ये आपको रिलेक्स करता है और शरीर में लिबिडो हार्मोन रीलिज करता है।

Monday, 8 August 2016

पेर के पंजो के अक्यूप्रेसर पोइंट

अक्यूप्रेसर हमारी प्राचीन चिकित्सा पध्धती है ।जो हमारे ऋषी ओ द्वार प्रसीध्ध हुई थी ।

इस चित्र में बताये गए बिन्दु ध्यान से पढिये और याद रखीये ।फिर इस लेख को आगे पढे ।
 

   इस चित्र मे बताये गए पोइंट हमारे पेर के पंजों मे होते है ।जो उस अंंग की स्विच की तरह काम करते है ।जिस अंग मे खामी होती है उस अंग के पोइंट पर दबाव डालने से वहा दर्द होता है ।जो उस अंग की कार्य क्षमता कम होने का निर्देश करती है ।
     अब आप अपने आप खुद का निदान कर सकते है ।हर रोज सुबह अपने दोनो पंजों को चित्र मे बताये गये पोइंट पर दबाव डाले ।अब जो पोइंट पर दर्द हो उस पोइंट के अंग मे खराबी होगी ।इस तरह का निदान इतना जल्दी होता है की आप जान कर हैरान रह जायेगे ।और MRI के जेस पक्का निदान होता है ।निदान जल्दी होजाने की वजह से आप जल्दी से अक्यूप्रेसर की मदद से इलाज भी कर सकेगे ।
         अब अपने आप निदान किया होगा तो आप को ए पता होगा की कोन कोन अंगो के पोइंट पर दर्द होता है ।जो भी पोइंट पर दर्द हो उस पोइंट पर 3सेकंड तक दबाये फिर 2सेकंड तक दबान हटालें   ऐसा 2मिनिट तक करे.और दिन मे सुबह शाम पोइंट को दबाये ।जब ए पोइंट का दर्द मिटेगा तब उस अंग व्यवस्थित काम करने लगेगा और रोग भी मीट जायेगा ।और आप ठीक हो जायेगे ।कम से कम 15 से 20 दिन मे आप ठीक होजऐगे ।

Sunday, 7 August 2016

हरस(Hemorrhoids)का आयुर्वेदिक और एक्यूप्रेशर द्वारा इलाज


     हरस(Hemorrhoids) की तकलीफ से आप परेशान है और आपको बिना ऑपरेशन किए ठीक होना है तो इसका तरीका मे आप को बताऊँगा जिसमे कोई भी अलोपेथीक दवाई की जरूरत नही पडती ।
       सबसे पहले आपको हरस मसा है की नही ए जानना जरूरी है ।इस तकलीफ का निदान आप अपने हाथ के पंजे से कर शकते है ।जो नीचे दिये फोटो से पता चलेगा
  
      ऊपर बताये गये फोटो मे जहा हरस (Hemorrhoids)  का जो बिंदु है वहा दबाव डालिये ।अगर वहा दबाव देनेसे आपको अजीब तरह का दर्द हो तो आपको हरस मसा की तकलीफ है ।और इस तरह के निदान से आपको कोई भी प्रकार का रिपोर्ट करने की जरुरत नही रेहती ।और आप का टाइम और पैसे दोनो बचते है ।
हरस के लिए नाभीचक्र ठीक करे 
 नाभिचक्र आपने स्थान पर है या नहीं यह पता लगाने के लिए कुछ दिशा निर्देश:-
(1) नाभिचक्र अपने स्थान पर है या नहीं यह पता लगाने के लिए सबसे पहले रोगी व्यक्ति को सुबह के समय में शौच क्रिया के बाद पीठ के बल सीधा लेट जाना चाहिए।रोगी व्यक्ति को अपने हाथ बगल में शरीर के साथ सीधे रखने चाहिए तथा दूसरे व्यक्ति को कहना चाहिए कि एक धागा लेकर नाभि से छाती की एक तरफ की निप्पल तक नापे।इसके बाद रोगी को यह क्रिया दूसरे निप्पल के साथ भी करनी चाहिए और पता करना चाहिए कि दोनों तरफ के निप्पल के साथ धागे की समान दूरी है या नहीं।
यदि निप्पल के दोनों ओर की दूरी समान नहीं है तो समझा लेना चाहिए कि नाभिचक्र अपने स्थान से हट गई है और यदि दूरी समान है तो समझना चाहिए कि नाभिचक्र अपने स्थान पर है।
(2) नाभिचक्र का अपने स्थान से हट जाने का पता लगाने का एक तरीका यह भी है कि सुबह के समय में खाली पेट पीठ के बल अपने दोनों टांगों को सीधा करके लेट जाए।यदि नाभिचक्र अपने स्थान से हटा हुआ होगा तो किसी एक पैर का अंगूठा दूसरे पैर के अंगूठे से कुछ ऊंचा उठा हुआ रहेगा अन्यथा नहीं। इसी तरह हाथ कि छोटी उंगली और रेखाए मिलाकर छोटी उंगली कि लम्बाई देखे ।ए बराबर होनी चाहिए। ऊपर -नीचे हो तो नाभीचक्र अपने स्थान से हटा हुआ होगा ।
 

नाभिचक्र का अपने स्थान पर हट जाने पर प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार:-
(1) अपने पैरों को नापने पर अंगूठा यदि नीचे की ओर दिखे तो उसे ऊपर की ओर खींचें। इस प्रकार की क्रिया 5-6 बार करें। ऐसा करने से नाभिचक्र अपने स्थान पर आ जाता है।
(2) नाभिचक्र को अपने स्थान पर करने के लिए सुबह के समय में रोगी व्यक्ति को बिना खाना खाए जमीन पर या तख्त पर सीधे लेट जाना चाहिए। इसके बाद अपनी टांगों को सामने की ओर फैला दें। फिर दायीं टांग के घुटने को ऊपर की ओर रखकर दाएं हाथ से दाएं घुटने पर थोड़ा सा दबाव देकर भूमि या तख्त पर लगाने की कोशिश करना चाहिए। लेकिन दबाव देते समय एक बात का ध्यान रखना चाहिए कि दबाव उतना ही दे जितना रोगी व्यक्ति सहन कर पाए। ठीक इसी प्रकार की क्रिया दूसरी टांग पर भी करनी चाहिए। इसके बाद 5 से 6 बार इस क्रिया को दोहराना भी चाहिए।
(3) नाभिचक्र अपने स्थान से हट जाने पर नाभि के अन्दर 2-3 बूंद तेल डालें। इसके बाद नाभि के चारों ओर तेल लगाकर दाईं से बाईं तरफ कम से कम तीन बार मालिश करें। इसके बाद नाभि के चारों ओर कम से कम तीन बार बाईं से दाईं तरफ मालिश करें।
 
इस प्रकार से उपचार करने से नाभिचक्र अपने स्थान पर  आ जाता है।
(4) नाभिचक्र अपने स्थान से हट जाने पर रोगी के दोनों पैरों के अंगूठों में धागा बांध दें।
(5) नाभिचक्र के अपने स्थान पर हटने पर नाभिचक्र को ठीक करने के लिए अर्थात नाभि को अपने स्थान पर लाने के लिए कई प्रकार के आसन है जिनको करने पर नाभिचक्र अपने स्थान पर आ जाता है।
आसन कुछ इस प्रकार के हैं- धनुरासन, नौकासन, भुजंगासन, चक्रासन, शवासन तथा उत्तानपादासन।
कब्ज दूर करे 
हरस के लए कब्ज दुर करे
1  कब्ज दूर करने के लिये नभिकेंद्र ठीक करे ।(जइसकी सम्पूर्ण जानकारी ऊपर दी गई है।)
2  आप जब शौच करने जोओ तब दाढी के मध्य भाग मे अँगूठे से दबाव दे और अंगूठा दाढी के मध्य मे रगडे ।
ऐसा करने से आप को ज्याद जोर नही लगाना पडेगा। 
(3 )गणेशक्रिया करे :-कब्ज कि तकलीफ हो उन्हे हाथ के बिच कि मोटी उंगली से मख्खन ले के गुदा मार्ग के जितना अंदर  जा सके उतना अंदर उंगली डालकर मालिश करे ।इस के बाद पेट को अंदर खींचे और बाहर निकले ।ऐसा करने से ज्याद मल बाहर आएगा । इस से कब्ज मिटेगा । हरस नही होंगा । और अंदर कि ओर जो प्रोस्टेट ग्रंथी है उसे भी मालिश हो जाएगी जिससे प्रोस्टेट ज्याद कार्यरत बनेगा । हर्निया और मूत्र कि तकलीफ से होने वाले रोग भी रुक जाएँगे ।
उपचार 
हरस के लिए अक्यूप्रेसर बिंदु

        ऊपर चित्र मे बताए अक्यूप्रेसर बिंदु को दिनमें सुबह दोपहर  शाम 3-4मिनिट तक दबाये (दबाने की रीत :- 3 सेकंड तक दबाव दे फिर 2 सेकंड तक दबाव हटालें )
आयुर्वेदिक इलाज 

नारियल की जटा से करे खुनी बवासीर का इलाज।
अगर आप बवासीर से परेशान हैं चाहे वो खुनी हो चाहे बादी, तो ये प्रयोग आपके लिए रामबाण से कम नहीं हैं। इस प्रयोग से पुरानी से पुरानी बवासीर 1 से 3 दिन में सही हो जाएगी। इस इलाज से एक दिन में ही रक्तस्राव बंद हो जाता है। बड़ा सस्ता व सरल उपाय है। एक बार इसको ज़रूर अपनाये। आइये जाने ये प्रयोग।
       नारियल की जटा लीजिए। उसे माचिस से जला दीजिए। जलकर भस्म बन जाएगी। इस भस्म को शीशी में भर कर ऱख लीजिए। कप डेढ़ कप छाछ या दही के साथ नारियल की जटा से बनी भस्म तीन ग्राम खाली पेट दिन में तीन बार सिर्फ एक ही दिन लेनी है। ध्यान रहे दही या छाछ ताजी हो खट्टी न हो। कैसी और कितनी ही पुरानी पाइल्स की बीमारी क्यों न हो, एक दिन में ही ठीक हो जाती है।
      यह नुस्खा किसी भी प्रकार के रक्तस्राव को रोकने में कारगर है। महिलाओं के मासिक धर्म में अधिक रक्तस्राव या श्वेत प्रदर की बीमारी में भी कारगर है। हैजा, वमन या हिचकी रोग में यह भस्म एक घूँट पानी के साथ लेनी चाहिए। ऐसे कितने ही नुस्खे हिन्दुस्तान के मंदिरों और मठों में साधु संन्यासियों द्वारा आजमाए हुए हैं। इन पर शोध किया जाना चाहिए।
     दवा लेने के एक घंटा पहले और एक घंटा बाद तक कुछ न खाएं तो चलेगा। अगर रोग ज्यादा जीर्ण हो और एक दिन दवा लेने से लाभ न हो तो दो या तीन दिन लेकर देखिए।
* हरे रंग के शाकभाजी का रस दिनभर ज्यादा से ज्यादा पीए ।
* मसा के ऊपर कोपरेल तेल की मालिश करे । *जंकफूड ,तला हुआ खोरक ,गरम मसले ,ज्यादा तीखा,ऐसे खोरक का सेवन बँध करे ।
    ऊपर बताये गये उपचार से आपको अगर मसा में से खून आता होंगा तो भी दो दिन मे फर्क पड जयेगा और 8 से 10 दिन मे आप स्वस्थ हो जायेगे ।